Wheat- PBW 872

PBW 872 (PAU)- समय पर बोया गया सिंचित गेहूं, जो लगभग 152 दिन में पक जाता है, ज़्यादा पैदावार (75–93 q/ha), चपाती की बेहतरीन क्वालिटी और ज़्यादा Fe और Zn वाला होता है। NWPZ के किसानों के लिए बढ़िया।
बायोफोर्टिफाइड, रस्ट-रेसिस्टेंट गेहूं, जिसकी चपाती की क्वालिटी बहुत अच्छी है और नॉर्थ-वेस्टर्न मैदानों के लिए सबसे ज़्यादा पैदावार की क्षमता है।
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सरकार द्वारा स्वीकृत किस्म

समय पर बोई गई, सिंचाई वाली उत्तर भारतीय स्थितियों के लिए PAU द्वारा सुझाई गई किस्म।

उत्तर भारतीय मिट्टी के प्रकारों के लिए उपयुक्त

पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी UP, राजस्थान और आस-पास के इलाकों के लिए अच्छी तरह से अनुकूल।

रोग सहनशीलता

खेत में होने वाली बड़ी रस्ट बीमारियों के प्रति अच्छी सहनशीलता दिखाता है।

उच्च उपज क्षमता

रिकमेंडेड क्रॉप मैनेजमेंट के तहत स्टेबल और हाई यील्ड देता है।

उत्कृष्ट अनाज गुणवत्ता

अच्छी पिसाई और चपाती क्वालिटी के साथ मोटे अनाज पैदा करता है।

किसान विश्वसनीय और प्रमाणित

लगातार परफॉर्मेंस और भरोसेमंद रिटर्न के लिए इसे बड़े पैमाने पर अपनाया गया है।

PBW 872 को क्यों चुनें?

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बायोफोर्टिफाइड अनाज (ज़्यादा Fe और Zn)- बेहतर न्यूट्रिशन + मार्केटिंग में बढ़त।

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अनुशंसित प्रबंधन के तहत उच्च उपज क्षमता

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भारतीय फ्लैटब्रेड के लिए अच्छी एंड-यूज़ क्वालिटी (चपाती स्कोर ~8.2)।

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बुआई का समय (Sowing Time)

PBW 872 की बुआई समय पर सिंचित परिस्थितियों में 10 नवम्बर से 30 नवम्बर के बीच करना उपयुक्त माना जाता है।

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कुल अवधि
(Crop Duration)

यह किस्म सामान्यतः लगभग 145–150 दिनों में पककर तैयार हो जाती है।

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उपज क्षमता (Yield Potential)

PBW 872 की औसत उपज लगभग 60–65 क्विंटल प्रति हेक्टेयर (24–26 क्विंटल प्रति एकड़) तक प्राप्त हो सकती है।

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दाना गुणवत्ता (Grain Quality)

इस किस्म के दाने अंबर रंग के, मध्यम-कठोर और अच्छी चपाती गुणवत्ता वाले होते हैं।

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रोग प्रतिरोध (Disease Resistance)

PBW 872 में पीली रतुआ (Yellow Rust) और भूरी रतुआ (Brown Rust) के प्रति अच्छा प्रतिरोध पाया जाता है।

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उपयुक्त क्षेत्र (Suitable Regions)

यह किस्म उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र जैसे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है।

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प्रबंधन सुझाव (Management Tips)

अच्छी उपज के लिए समय पर बुआई, संतुलित NPK उर्वरक प्रबंधन और 4–5 महत्वपूर्ण अवस्थाओं पर सिंचाई करना लाभदायक रहता है।