Wheat- PBW 826
PBW 826 एक PAU-ब्रेड, ज़्यादा पैदावार वाली गेहूं की किस्म है जिसे उत्तर भारत में समय पर बोई जाने वाली सिंचाई वाली जगहों के लिए बनाया गया है। इसमें कम से मीडियम पकने की अवधि के साथ मोटा, अच्छी क्वालिटी का अनाज और बेहतर गर्मी और ज़ंग सहने की क्षमता होती है, जिससे यह पंजाब और आस-पास के राज्यों में किसानों की पसंदीदा पसंद बन गई है।
सरकार द्वारा स्वीकृत किस्म
उत्तर भारत में समय पर बोई जाने वाली, सिंचाई वाली जगहों के लिए PAU की बताई गई गेहूं की किस्म।
उत्तर भारतीय मिट्टी के प्रकारों के लिए उपयुक्त
पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी UP, राजस्थान और आस-पास के इलाकों के लिए अच्छी तरह से अनुकूल।
रोग सहनशीलता
रस्ट सहित गेहूं की बड़ी बीमारियों के प्रति अच्छी सहनशीलता दिखाता है।
उच्च उपज क्षमता
खेती के बताए गए तरीकों से स्थिर और अच्छी पैदावार देता है।
उत्कृष्ट अनाज गुणवत्ता
अच्छी पिसाई और चपाती बनाने की क्वालिटी के साथ मोटे अनाज पैदा करता है।
किसान विश्वसनीय और प्रमाणित
भरोसेमंद परफॉर्मेंस और लगातार रिटर्न के लिए किसान इसे पसंद करते हैं।
PBW 826 को क्यों चुनें?
हीट टॉलरेंस और रेसिलिएंस - बाद के ग्रोथ स्टेज में हीट स्ट्रेस में काम करने के लिए डेवलप किया गया।
लगातार ज़्यादा पैदावार - पूरे भारत में हुए ट्रायल में सबसे ऊपर रहा और 2024-25 में सबसे ज़्यादा अनाज की पैदावार दी।
अनाज की अच्छी क्वालिटी - मोटे दाने, ज़्यादा हेक्टोलिटर वज़न; मिलिंग और चपाती क्वालिटी के लिए सही।

बुआई का समय (Sowing Time)
समय पर सिंचित परिस्थितियों में PBW 826 की बुआई का उपयुक्त समय 10 नवम्बर से 30 नवम्बर के बीच माना जाता है।

कुल अवधि
(Crop Duration)
यह मध्यम अवधि की किस्म है जो सामान्यतः लगभग 145–148 दिनों में पककर तैयार हो जाती है।

उपज क्षमता (Yield Potential)
PBW 826 की औसत उपज लगभग 24 क्विंटल प्रति एकड़ (63–65 क्विंटल प्रति हेक्टेयर) तथा संभावित उपज 80 क्विंटल/हेक्टेयर तक हो सकती है।

दाना गुणवत्ता (Grain Quality)
इस किस्म के दाने मोटे, चमकदार (लस्टरस) और उच्च हेक्टोलिटर वजन वाले होते हैं जो आटा व चपाती गुणवत्ता के लिए अच्छे माने जाते हैं।

रोग प्रतिरोध (Disease Resistance)
PBW 826 में पीली रतुआ (Yellow Rust) और भूरी रतुआ (Brown Rust) के प्रति मध्यम प्रतिरोध पाया जाता है।

उपयुक्त क्षेत्र (Suitable Regions)
यह किस्म उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र (Punjab, Haryana, Delhi, Rajasthan, Western UP) तथा पूर्वी मैदानी क्षेत्रों में सिंचित परिस्थितियों के लिए उपयुक्त है।

प्रबंधन सुझाव (Management Tips)
अच्छी उपज के लिए समय पर बुआई, संतुलित NPK उर्वरक प्रबंधन और सिंचाई का पालन करना आवश्यक है।
