Pusa Basmati PB-1847
Pusa Basmati 1847 (PB-1847) — early-maturing premium Basmati with extra-long slender grains, strong aroma, high yield and built-in resistance to BLB & blast. Ideal for premium markets and sustainable farming.
सरकार द्वारा अनुमोदित किस्म
ICAR द्वारा विकसित बासमती की यह किस्म उत्तरी भारत की सिंचित परिस्थितियों के लिए उपयुक्त है।
उत्तर भारतीय मिट्टी के प्रकारों के लिए उपयुक्त
पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू क्षेत्रों के लिए अच्छी तरह से अनुकूलित।
रोग सहनशीलता
यह ब्लास्ट और बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट जैसी प्रमुख बीमारियों के प्रति बेहतर सहनशीलता दर्शाता है।
उच्च उपज क्षमता
पारंपरिक बासमती किस्मों की तुलना में, यह जल्दी पकने के साथ-साथ अच्छी पैदावार भी देता है।
उत्कृष्ट दाने की गुणवत्ता
बेहद लंबे, पतले दाने, जिनमें अच्छी लंबाई बढ़ने की क्षमता और बासमती की खास खुशबू होती है।
किसान विश्वसनीय और प्रमाणित
जल्दी कटाई, भरोसेमंद प्रदर्शन और बाज़ार के अनुकूल अनाज की गुणवत्ता के लिए इसे प्राथमिकता दी जाती है।
PB 1847 क्यों चुनें ?
बेहद लंबे, खुशबूदार बासमती चावल, जो पकने पर बहुत ज़्यादा लंबे होते हैं।
कटाई तेज़ी से होती है, जोखिम कम होता है, और फ़सल की योजना बेहतर होती है।
इसमें BLB और ब्लास्ट के प्रति अंतर्निहित प्रतिरोधक क्षमता है, जिससे कम छिड़काव की आवश्यकता होती है।

बुआई का समय (Sowing Time)
PB-1847 की नर्सरी बुआई मई के अंतिम सप्ताह से जून के पहले पखवाड़े तक तथा रोपाई जून के अंत से जुलाई के पहले सप्ताह तक उपयुक्त रहती है।

कुल अवधि
(Crop Duration)
यह किस्म सामान्यतः लगभग 135–140 दिनों में पककर तैयार हो जाती है।

उपज क्षमता (Yield Potential)
PB-1847 की औसत उपज लगभग 20–22 क्विंटल प्रति एकड़ (50–55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर) तक प्राप्त हो सकती है।

दाना गुणवत्ता (Grain Quality)
इस किस्म के दाने अतिरिक्त लंबे, पतले, कम चॉकनेस वाले तथा पकने पर उत्कृष्ट लंबाई बढ़ोतरी और अच्छी खुशबू वाले होते हैं।

रोग प्रतिरोध (Disease Resistance)
PB-1847 में ब्लास्ट और बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट (BLB) के प्रति अच्छा प्रतिरोध पाया जाता है।

उपयुक्त क्षेत्र (Suitable Regions)
यह किस्म उत्तर भारत के बासमती उगाने वाले क्षेत्र जैसे पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू क्षेत्र के लिए उपयुक्त है।

प्रबंधन सुझाव (Management Tips)
अच्छी उपज और गुणवत्ता के लिए समय पर रोपाई, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और नियंत्रित सिंचाई (खासकर दाने भरने के समय) अपनाना आवश्यक है।
