बरसीम हड्डू
बरसीम एक उच्च गुणवत्ता वाली दलहनी चारा फसल है, जिसमें लगभग 18 से 28 प्रतिशत कच्चा प्रोटीन और करीब 70 प्रतिशत तक पाचन योग्य सूखा पदार्थ होता है। यही कारण है कि यह गाय, भैंस और बकरियों जैसे दुग्ध देने वाले पशुओं के लिए अत्यंत उपयुक्त चारा माना जाता है।
सरकार द्वारा अनुमोदित किस्म
उत्तर भारत में सिंचित चारे की खेती के लिए उपयुक्त बरसीम की उन्नत किस्म।
उत्तर भारतीय मिट्टी के प्रकारों के लिए उपयुक्त
यह पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन करता है।
रोग सहनशीलता
खेत की परिस्थितियों में यह सामान्य पत्ती रोगों के प्रति अच्छी सहनशीलता दिखाता है।
उच्च उपज क्षमता
यह भरपूर मात्रा में हरा चारा प्रदान करता है और इसमें कई बार कटाई करने और दोबारा उगने की मजबूत क्षमता होती है।
उत्कृष्ट अनाज गुणवत्ता
यह मुलायम, पत्तेदार और प्रोटीन से भरपूर चारा पैदा करता है जो खाने में बेहद स्वादिष्ट होता है।
किसान विश्वसनीय और प्रमाणित
पशुओं के लिए चारे की निरंतर आपूर्ति और बेहतर उत्पादकता के लिए इसे व्यापक रूप से पसंद किया जाता है।
बरसीम हड्डू को क्यों चुनें ?
यह किस्म अधिक कटिंग के साथ पूरे सीजन भर लगातार भरपूर चारा देती है। इससे पशुओं के लिए चारे की कमी नहीं रहती और लागत भी नियंत्रित रहती है।
हर कटाई के बाद पौधे तेजी से दोबारा बढ़ते हैं, जिससे अगली कटिंग जल्दी मिलती है। इससे समय की बचत होती है और उत्पादन चक्र बेहतर बनता है।
इसमें प्रोटीन और पाचन योग्य तत्व अधिक होते हैं, जो पशुओं के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हैं। नियमित खिलाने से दूध की मात्रा और गुणवत्ता दोनों में सुधार होता है।

बुआई का समय (Sowing Time)
बरसीम हड्डू की बुआई सितम्बर के अंत से अक्टूबर के मध्य तक करना सबसे उपयुक्त रहता है।

कुल अवधि
(Crop Duration)
यह बहु-कट किस्म है जो लगभग 150–170 दिनों तक लगातार हरा चारा देती रहती है।

उपज क्षमता (Yield Potential)
इस किस्म से लगभग 350–450 क्विंटल प्रति एकड़ (900–1100 क्विंटल प्रति हेक्टेयर) हरा चारा प्राप्त किया जा सकता है।

दाना गुणवत्ता (Grain Quality)
यह चारा फसल होने के कारण इसमें उच्च प्रोटीन (लगभग 18–25%) और अत्यधिक सुपाच्य हरा चारा मिलता है।

रोग प्रतिरोध (Disease Resistance)
बरसीम हड्डू में जड़ सड़न (Root Rot) व तना सड़न (Stem Rot) के प्रति अच्छी सहनशीलता पाई जाती है।

उपयुक्त क्षेत्र (Suitable Regions)
यह किस्म उत्तर भारत के सिंचित क्षेत्र जैसे पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में अच्छी तरह उगती है।

प्रबंधन सुझाव (Management Tips)
अधिक उत्पादन के लिए अच्छी जल निकासी, पहली कटाई 50–55 दिन में और बाद की कटाई 20–25 दिन के अंतराल पर, साथ ही संतुलित उर्वरक व सिंचाई प्रबंधन आवश्यक है।
